Odisha Balangir में चिप्स पैकेट फटने से 8 साल के बच्चे की आंख गई, परिवार ने कंपनी पर FIR दर्ज कराई, जांच जारी

ओडिशा के बलांगीर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे राज्य ही नहीं, देश भर के माता-पिता को चिंता में डाल दिया है। मामूली सा दिखने वाला स्नैक पैकेट एक आठ साल के मासूम बच्चे की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गया और उसका बचपन एक दर्दनाक हादसे की छाया में चला गया। टिटिलागढ़ थाना क्षेत्र के शगड़घाट गांव में रहने वाला अंकेश हरपाल नाम का बच्चा रोज़ की तरह घर के पास की दुकान से पाँच रुपये का पफकॉर्न पैकेट लेकर आया। उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह छोटा सा पैकेट उसके भविष्य से रोशनी छीनने वाला है।

बच्चा घर आने के बाद आराम से चिप्स खा रहा था। पैकेट से एक छोटा खिलौना निकला, जैसा कि अक्सर कई स्नैक कंपनियां बच्चों को लुभाने के लिए डालती हैं। अंकेश ने मज़ाक-मस्ती में उस खिलौने को पास ही जली हुई आग में फेंक दिया। कुछ ही सेकंड बाद तेज धमाके की आवाज आई और धुएं के बीच वह ज़मीन पर गिर पड़ा। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के लोगों में भगदड़ मच गई। बच्चा अपनी आंख पर हाथ रखकर दर्द से चीख रहा था और खून बह रहा था।

परिवार के लोग तुरंत उसे टिटिलागढ़ अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि धमाके के कारण बच्चे की एक आंख पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। डॉक्टरों के अनुसार धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आंख की अंदरूनी संरचना नष्ट हो गई, नसें कट गईं और कोई भी सर्जरी या आधुनिक इलाज दृष्टि वापस नहीं ला सकता। इस हादसे ने परिवार की दुनिया ही उलट दी। माता-पिता की मानें तो उनका बच्चा सामान्य से दिन में एक सामान्य सा पैकेट खरीदकर आया था, लेकिन हादसे ने पूरी ज़िंदगी अंधेरे में धकेल दी।

परिवार का दुख और गुस्सा दोनों समझ में आता है। उन्होंने घटना की शिकायत टिटिलागढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है और पैकेट बनाने वाली कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। परिवार का कहना है कि अगर कंपनी सुरक्षा मानकों का पालन करती तो पैकेट में कोई ऐसा खिलौना नहीं आता जो विस्फोटक प्रकृति का हो। उन्होंने न्याय की मांग की है और चाहते हैं कि ऐसे उत्पाद बाजार से हटाए जाएं, ताकि किसी अन्य बच्चे की ज़िंदगी बर्बाद न हो।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जब्त पैकेट, खिलौने और विस्फोट के अवशेषों को जांच के लिए भेजा गया है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या खिलौना निर्माण मानकों के खिलाफ था या उसे गलत तरीके से पैक किया गया था। विशेषज्ञों से राय ली जा रही है कि आखिर किस तरह इतनी कम कीमत वाले सामान के भीतर ऐसा धमाका संभव हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में उपभोक्ता सुरक्षा कानून, खाद्य सुरक्षा अधिनियम और निर्माण मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा।

इस घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। कई माता-पिता ने बच्चों को चेतावनी दी है कि किसी भी पैकेट, मिठाई या बाजार से मिलने वाले खिलौने को आग के पास न ले जाएं। स्थानीय दुकानदारों पर भी दबाव है कि वे उत्पाद की गुणवत्ता और कंपनी के नाम की जांच कर बेचें। कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि खिलौने की आड़ में कंपनियां बच्चों के हाथों में किस प्रकार की सामग्री दे रही हैं। क्या कंपनियां केवल मार्केटिंग और बिक्री बढ़ाने की कोशिश में बच्चों की सुरक्षा भूल चुकी हैं?

इस हादसे ने स्नैक पैकिंग की दुनिया के एक अनदेखे खतरे को उजागर किया है। अक्सर हम जो चीजें रोजमर्रा में खरीदते और खाते हैं उन्हें सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया कि पैक्ड फूड के हर तत्व को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। खिलौना छोटा हो या साधारण, वह अगर गलत तरीके से बनाया गया या रसायनों के संपर्क में रहा तो खतरा असामान्य रूप से बड़ा हो सकता है।

अंकेश का परिवार अब इलाज और इंसाफ दोनों की लड़ाई लड़ रहा है। उनकी केवल एक मांग है कि जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिले और आने वाले दिनों में ऐसे पैकेट और उत्पाद सख्ती से टेस्ट और जांच के बाद ही बाजार में आएं। बच्चा अब भी अस्पताल में इलाज कर रहा है और धीरे-धीरे सदमे से बाहर आने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी आंख की रोशनी हमेशा के लिए बुझ चुकी है और इसके साथ ही उसके बचपन की आज़ादी और मासूमियत का एक हिस्सा भी खो गया है।

इस घटना ने हमें याद दिलाया कि छोटी-सी गलती, लापरवाही या अनदेखी का कितना बड़ा परिणाम हो सकता है। उम्मीद है कि यह दर्दनाक घटना प्रशासन, कंपनियों और उपभोक्ताओं — तीनों को जागरूक करेगी और किसी और घर में ऐसा अंधेरा नहीं उतरेगा।

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