भारत की प्रमुख मेटल और माइनिंग कंपनियों में शामिल वेदांता लिमिटेड ने एक बार फिर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी ने अपनी प्रमुख सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में से 1.59 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस हिस्सेदारी बिक्री से वेदांता को लगभग 500.8 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,600 से 4,900 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब धातु क्षेत्र में स्थिर मांग बनी हुई है और हिंदुस्तान जिंक के शेयरों ने हाल के महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया है। बाजार विशेषज्ञ इसे वेदांता की दीर्घकालिक वित्तीय रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
ऑफर फॉर सेल के जरिए बाजार में उतारे जाएंगे शेयर
वेदांता द्वारा हिंदुस्तान जिंक की हिस्सेदारी की बिक्री ऑफर फॉर सेल यानी OFS के माध्यम से की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी लगभग 6.7 करोड़ इक्विटी शेयर शेयर बाजार में पेश करेगी, जो हिंदुस्तान जिंक की कुल इक्विटी का 1.59 प्रतिशत हिस्सा है। कंपनी ने इसके लिए प्रति शेयर 685 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह कीमत हालिया बाजार भाव से थोड़ी कम रखी गई है ताकि निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। OFS को दो कारोबारी दिनों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहले दिन गैर-रिटेल निवेशकों को मौका मिलेगा और दूसरे दिन रिटेल निवेशक इसमें भाग ले सकेंगे।
हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी वेदांता का नियंत्रण बरकरार
इस स्टेक सेल के बाद भी हिंदुस्तान जिंक में वेदांता का नियंत्रण बना रहेगा। फिलहाल कंपनी के पास हिंदुस्तान जिंक में करीब 61.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि भारत सरकार के पास लगभग 27.9 प्रतिशत शेयर हैं। 1.59 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद भी वेदांता के पास कंपनी में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रहेगा। इसका मतलब साफ है कि यह बिक्री प्रमोटर कंट्रोल छोड़ने के लिए नहीं बल्कि पूंजी जुटाने के उद्देश्य से की जा रही है। इससे कंपनी के प्रबंधन या रणनीतिक दिशा में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं मानी जा रही।
वेदांता ने क्यों चुना यह समय
वेदांता द्वारा इस समय हिस्सेदारी बिक्री का फैसला कई कारणों से अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ा कारण समूह की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना है। वेदांता ग्रुप पिछले कुछ वर्षों से अपने कर्ज स्तर को कम करने और नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। हिंदुस्तान जिंक जैसी मजबूत और लाभकारी कंपनी में हिस्सेदारी की बिक्री से तुरंत बड़ी रकम जुटाई जा सकती है, जिससे कर्ज प्रबंधन में मदद मिलती है। इसके अलावा, जब किसी कंपनी के शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, तब स्टेक सेल को रणनीतिक रूप से सही समय माना जाता है।

हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का मजबूत प्रदर्शन
हिंदुस्तान जिंक के शेयरों ने हाल के महीनों में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। धातु कीमतों में स्थिरता, मजबूत उत्पादन क्षमता और लागत नियंत्रण के चलते कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। जिंक, लेड और सिल्वर जैसे धातुओं की घरेलू और वैश्विक मांग ने कंपनी के बिजनेस को सपोर्ट किया है। यही कारण है कि बाजार में हिंदुस्तान जिंक को एक मजबूत और भरोसेमंद कंपनी के रूप में देखा जाता है। वेदांता द्वारा हिस्सेदारी बिक्री को कई निवेशक इस मजबूती से लाभ उठाने के कदम के रूप में देख रहे हैं।
बाजार पर क्या पड़ सकता है असर
हिस्सेदारी बिक्री की खबर के बाद शेयर बाजार में हलचल स्वाभाविक है। आमतौर पर OFS की घोषणा के बाद शेयर पर अल्पकालिक दबाव देखा जा सकता है, क्योंकि बाजार में बड़ी मात्रा में शेयर उपलब्ध हो जाते हैं। हालांकि लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स इस दबाव को संतुलित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी का बिजनेस प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो शेयर में स्थिरता लौट सकती है। इस OFS को लेकर संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पहले भी हिस्सेदारी घटा चुकी है वेदांता
वेदांता के लिए हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचना कोई नया कदम नहीं है। इससे पहले भी कंपनी अलग-अलग चरणों में अपनी हिस्सेदारी घटा चुकी है। हर बार इसका मकसद ग्रुप स्तर पर वित्तीय संतुलन को बेहतर बनाना रहा है। इन कदमों से वेदांता को अपनी अन्य परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिली है। मौजूदा बिक्री भी उसी दीर्घकालिक रणनीति की कड़ी मानी जा रही है, जिसमें कंपनी अपनी मूल्यवान परिसंपत्तियों का आंशिक मोनेटाइजेशन कर रही है।
निवेशकों के नजरिए से कितना अहम है यह फैसला
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि हिस्सेदारी बिक्री का मतलब कंपनी के बिजनेस में कमजोरी नहीं होता। अक्सर बड़ी कंपनियां अपनी मजबूत सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाती हैं। हिंदुस्तान जिंक की बात करें तो इसकी उत्पादन क्षमता, कम लागत वाला ऑपरेशन और स्थिर डिविडेंड नीति इसे निवेशकों के बीच आकर्षक बनाती है। दीर्घकालिक निवेशक आमतौर पर ऐसे OFS को अवसर के रूप में देखते हैं, बशर्ते कंपनी की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी रहे।
मेटल सेक्टर और भविष्य की संभावनाएं
भारत में मेटल सेक्टर आने वाले वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास, ऑटोमोबाइल सेक्टर और औद्योगिक मांग के चलते अहम भूमिका निभाने वाला है। जिंक और लेड जैसी धातुओं की मांग इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों से जुड़ी होती है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनी के लिए दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक मानी जा रही हैं। वेदांता द्वारा की जा रही हिस्सेदारी बिक्री को सेक्टर की कमजोरी के बजाय कॉर्पोरेट फाइनेंसिंग रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।