US Stock Market Today: Supreme Court के फैसले से Dow, S&P 500 और Nasdaq में जबरदस्त तेजी

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अमेरिका के शेयर बाजार में आज मजबूत तेजी देखने को मिली। निवेशकों के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी, क्योंकि Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार दे दिया। इस फैसले के तुरंत बाद बाजार में खरीदारी बढ़ी और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।

यह खबर सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह फैसला क्या है, इसका बाजार पर क्या असर पड़ा और आगे निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं।

बाजार का हाल: तीनों प्रमुख सूचकांक मजबूत

फैसले के बाद अमेरिका के तीन प्रमुख शेयर सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।

सबसे पहले बात करें Dow Jones Industrial Average की, तो इसमें लगभग 0.4% की बढ़त दर्ज की गई। यह सूचकांक अमेरिका की 30 बड़ी और मजबूत कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। निवेशकों का भरोसा लौटने से इस इंडेक्स में स्थिर लेकिन मजबूत तेजी देखी गई।

वहीं S&P 500 में करीब 0.5% की उछाल आई। यह सूचकांक 500 बड़ी अमेरिकी कंपनियों को दर्शाता है और इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसमें आई तेजी बताती है कि बाजार ने इस फैसले को सकारात्मक रूप से लिया है।

तकनीकी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला Nasdaq Composite लगभग 0.7% तक चढ़ गया। टेक सेक्टर में पहले से ही मजबूती थी, और टैरिफ हटने की खबर ने इस सेक्टर में नई ऊर्जा भर दी।

क्या था टैरिफ विवाद?

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों पर भारी आयात शुल्क लगाए थे। उनका उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना था। ये टैरिफ खासतौर पर चीन सहित कई देशों के उत्पादों पर लगाए गए थे।

इन टैरिफ को लागू करने के लिए प्रशासन ने 1977 के कानून International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का सहारा लिया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को आपातकालीन परिस्थितियों में आर्थिक फैसले लेने की शक्ति दी गई है।

लेकिन सवाल यह उठा कि क्या इन टैरिफ को वास्तव में “राष्ट्रीय आपातकाल” की श्रेणी में रखा जा सकता है? इसी मुद्दे पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को इतने व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार संविधान के तहत सीमित है। कोर्ट का मानना था कि इस तरह के बड़े फैसलों के लिए कांग्रेस की भूमिका जरूरी है।

6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने साफ कर दिया कि कार्यपालिका (Executive) अपनी सीमाओं से आगे नहीं जा सकती। यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि संवैधानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस निर्णय के साथ ही बाजार में अनिश्चितता का एक बड़ा बादल छंट गया। निवेशकों को लगा कि अब व्यापार नीति अधिक स्पष्ट और स्थिर होगी।

निवेशकों की मनोदशा में बदलाव

पिछले कुछ महीनों से बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी। टैरिफ को लेकर लगातार कानूनी लड़ाई और राजनीतिक बयानबाजी ने निवेशकों को सतर्क बना दिया था। कई कंपनियों की लागत बढ़ गई थी, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ा।

जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, निवेशकों ने इसे राहत के रूप में लिया। आयात पर निर्भर कंपनियों—जैसे ऑटोमोबाइल, रिटेल और टेक सेक्टर—में तेजी से खरीदारी देखी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ हटने से कच्चे माल और तैयार माल की लागत कम हो सकती है, जिससे कंपनियों के मुनाफे में सुधार संभव है।

टेक सेक्टर में सबसे ज्यादा उत्साह

नैस्डैक में आई सबसे ज्यादा तेजी यह दिखाती है कि टेक कंपनियों को इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत मिली है। कई टेक कंपनियां अपने उत्पादों और पार्ट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर निर्भर रहती हैं।

टैरिफ के कारण उनके लिए आयात महंगा हो गया था। अब जब कानूनी अड़चन हट गई है, तो इन कंपनियों को भविष्य में बेहतर मार्जिन की उम्मीद है। यही वजह है कि निवेशकों ने टेक शेयरों में तेजी से निवेश किया।

कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बावजूद मजबूती

हाल ही में जारी आर्थिक आंकड़ों में चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि उम्मीद से कम रही। इसके अलावा महंगाई (Inflation) भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है। आमतौर पर ऐसे आंकड़े बाजार पर दबाव डालते हैं।

लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन चिंताओं को कुछ हद तक पीछे छोड़ दिया। निवेशकों को लगा कि व्यापारिक स्पष्टता आने से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

वैश्विक बाजारों पर असर

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहां की किसी भी बड़ी नीति का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यूरोप और एशिया के बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखा गया।

निर्यात पर निर्भर देशों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि टैरिफ हटने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुधार की उम्मीद है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह संकेत सकारात्मक है, खासकर उन सेक्टरों के लिए जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।

राजनीतिक और आर्थिक संदेश

यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है। इससे यह संदेश गया है कि अमेरिकी लोकतंत्र में संस्थाएं मजबूत हैं और वे कार्यपालिका की शक्तियों की समीक्षा कर सकती हैं।

आर्थिक रूप से यह संकेत देता है कि व्यापार नीति में स्थिरता आने की संभावना है। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी चीज होती है—नीतिगत स्पष्टता। जब नियम स्पष्ट होते हैं, तो निवेश का माहौल बेहतर होता है।

आगे क्या हो सकता है?

हालांकि बाजार ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। कुछ टैरिफ अभी भी अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत लागू हो सकते हैं। साथ ही, आने वाले चुनाव और राजनीतिक बदलाव भी व्यापार नीति को प्रभावित कर सकते हैं।

इसके अलावा, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करेंगे। अगर महंगाई कम होती है और ब्याज दरों में स्थिरता रहती है, तो बाजार को और समर्थन मिल सकता है।

आम निवेशकों के लिए क्या मतलब?

यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि बाजार सिर्फ एक खबर पर नहीं चलता। आज की तेजी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन दीर्घकालीन निवेश के लिए मजबूत कंपनियों और संतुलित पोर्टफोलियो की जरूरत होती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घबराहट या उत्साह में बड़े फैसले लेने से बचें। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है। लंबी अवधि का नजरिया हमेशा बेहतर परिणाम देता है।

सरल शब्दों में समझें

मान लीजिए कि किसी दुकान पर सामान बाहर से आता है। अगर सरकार उस सामान पर ज्यादा टैक्स लगा दे, तो दुकान को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। वह या तो ग्राहक से ज्यादा पैसा लेगा या खुद का मुनाफा कम करेगा।

अब अगर वह टैक्स हट जाए, तो दुकान की लागत कम हो जाएगी। यही स्थिति कंपनियों की भी होती है। टैरिफ हटने से उनकी लागत कम हो सकती है और मुनाफा बढ़ सकता है। इसी उम्मीद ने बाजार को ऊपर उठाया।

निष्कर्ष: राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बाजार को बड़ी राहत दी है। डॉव, S&P 500 और नैस्डैक की तेजी यह दिखाती है कि निवेशकों ने इस निर्णय को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

लेकिन बाजार की यात्रा लंबी होती है। आर्थिक आंकड़े, वैश्विक घटनाएं और राजनीतिक फैसले आगे भी असर डालते रहेंगे। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि आज का दिन अमेरिकी बाजार के लिए उत्साह और भरोसे का दिन रहा।

निवेशकों के लिए संदेश साफ है—सूझबूझ से निवेश करें, खबरों को समझें और लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं। क्योंकि बाजार में स्थायी सफलता जल्दबाजी से नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी से मिलती है।

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