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Ujjain Tarana Violence: छोटी घटना से भड़की हिंसा, Bus जलने से मचा हड़कंप

उज्जैन जिले के तराना कस्बे में एक बार फिर शांति भंग हो गई, जब गुरुवार रात शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक झड़प में बदल गया और देखते ही देखते पूरे इलाके में तनाव फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक स्थानीय युवक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद हालात बिगड़ने लगे और थोड़ी ही देर में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। पहले नारेबाजी और बहस हुई, लेकिन इसके बाद माहौल पूरी तरह हिंसक हो गया और भीड़ ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कई घरों पर पत्थर फेंके गए, जिससे खिड़कियों के कांच टूट गए और लोगों में डर बैठ गया। हालात इतने बिगड़ गए कि लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर अंदर छिपने को मजबूर हो गए। हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा और बस स्टैंड के पास खड़ी एक यात्री बस में आग लगा दी गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें और धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया, जिसके कारण आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। कई दुकानों को बंद कर दिया गया और बाजारों में सन्नाटा पसर गया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि छोटी-सी चिंगारी किस तरह पूरे इलाके की शांति को भंग कर सकती है।

Ujjain Tarana Violence: छोटी घटना से भड़की हिंसा
Ujjain Tarana Violence: छोटी घटना से भड़की हिंसा

जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली, अधिकारी तुरंत हरकत में आए और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचाया गया। हालात को काबू में करने के लिए इलाके में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त शुरू कर दी गई। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने एहतियातन धारा 144 लागू कर दी, ताकि किसी भी तरह की भीड़ एकत्र न हो सके। पुलिस ने हिंसा फैलाने वाले लोगों की पहचान शुरू कर दी है और कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि गलत सूचनाएं हालात को और बिगाड़ सकती हैं। इस घटना का असर सामान्य जनजीवन पर साफ तौर पर देखने को मिला, जहां स्कूल, दुकानें और बाजार एहतियातन बंद कर दिए गए और लोग अनिश्चितता के माहौल में अपने घरों में ही रहे। खासकर महिलाएं और बच्चे इस घटना से सहमे हुए नजर आए और लोगों में डर का माहौल बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इतनी जल्दी हिंसा में बदल जाएगा। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर नजर रखी जा रही है और भड़काऊ संदेश फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ड्रोन और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी हुई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि प्रशासन का दावा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है और पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। तराना की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सामाजिक सौहार्द और आपसी समझ कितनी जरूरी है, क्योंकि हिंसा का रास्ता केवल नुकसान और डर की ओर ले जाता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कितनी जल्दी हालात को पूरी तरह सामान्य कर पाता है और इलाके में फिर से शांति और विश्वास का माहौल बनता है।

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