देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी Reliance Industries Limited (RIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही यानी Q3 के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹18,645 करोड़ हो गया है। भले ही मुनाफे में बढ़ोतरी बहुत बड़ी न दिखे, लेकिन यह आंकड़ा रिलायंस की मजबूत स्थिति और स्थिर कारोबारी मॉडल को साफ तौर पर दर्शाता है।
आज के दौर में जब वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, ऐसे समय में रिलायंस का मुनाफा बनाए रखना निवेशकों और बाजार दोनों के लिए भरोसे की बात मानी जा रही है।
मुनाफा बढ़ा, लेकिन रफ्तार धीमी क्यों रही
रिलायंस का Q3 मुनाफा पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में करीब आधा प्रतिशत बढ़ा है। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनी ने कमाई में गिरावट नहीं आने दी, लेकिन तेज उछाल भी नहीं दिखा।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि रिलायंस के कुछ पारंपरिक कारोबार, खासकर तेल और गैस से जुड़े बिजनेस पर दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मार्जिन में कमी का असर कंपनी की कुल कमाई पर पड़ा। इसके बावजूद रिलायंस ने संतुलन बनाए रखा, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
जियो बना रिलायंस की ग्रोथ की सबसे मजबूत कड़ी
अगर रिलायंस के इस तिमाही प्रदर्शन को करीब से देखें, तो साफ पता चलता है कि Reliance Jio कंपनी का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। जियो के मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है और डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
5G नेटवर्क के विस्तार से डेटा की खपत बढ़ी है और प्रति ग्राहक औसत कमाई में भी सुधार हुआ है। इसका मतलब यह है कि जियो सिर्फ नए ग्राहक ही नहीं जोड़ रहा, बल्कि मौजूदा ग्राहकों से भी बेहतर कमाई कर पा रहा है। आने वाले समय में यही डिजिटल कारोबार रिलायंस की कमाई को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है।
रिटेल बिजनेस ने दिखाई भरोसेमंद बढ़त
रिलायंस का रिटेल कारोबार भी Q3 में लगातार आगे बढ़ता नजर आया। देश के छोटे शहरों और कस्बों में रिलायंस रिटेल की मौजूदगी बढ़ रही है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
हालांकि रिटेल से होने वाला मुनाफा अभी जियो जितना बड़ा नहीं है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कारोबार लंबे समय तक स्थिर कमाई देने की क्षमता रखता है। बदलती उपभोक्ता आदतों के साथ रिलायंस रिटेल खुद को तेजी से ढाल रहा है।
O2C कारोबार अब भी कमाई का सबसे बड़ा आधार
रिलायंस का Oil-to-Chemicals यानी O2C बिजनेस आज भी कंपनी की कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा देता है। रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स से आने वाली आय ने Q3 में भी कंपनी को मजबूत सहारा दिया।
हालांकि इस सेक्टर में मार्जिन पहले जैसा मजबूत नहीं रहा, लेकिन इसके बावजूद O2C बिजनेस ने रिलायंस को स्थिरता प्रदान की। यही वजह है कि डिजिटल और रिटेल कारोबार के साथ-साथ यह पारंपरिक बिजनेस भी कंपनी के लिए अहम बना हुआ है।
खर्च बढ़ा, निवेश भी बड़ा रहा
Q3 के दौरान रिलायंस ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर निवेश किया है। 5G नेटवर्क, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर कंपनी का फोकस लगातार बढ़ रहा है।
इन निवेशों की वजह से कंपनी के खर्च भी बढ़े हैं, जिसका असर मुनाफे की रफ्तार पर पड़ा। लेकिन जानकार मानते हैं कि ये खर्च भविष्य में बड़े रिटर्न देने वाले साबित हो सकते हैं।
शेयर बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया
रिलायंस के Q3 नतीजों के बाद शेयर बाजार में ज्यादा हलचल देखने को नहीं मिली। निवेशकों ने इस रिजल्ट को संतुलित नजरिए से लिया। नतीजे न तो बहुत शानदार रहे और न ही निराशाजनक।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रिलायंस अब भी एक भरोसेमंद कंपनी मानी जा रही है, क्योंकि इसका बिजनेस मॉडल मजबूत है और कंपनी लगातार भविष्य की तैयारी कर रही है।
रिलायंस किस दिशा में बढ़ रही है
रिलायंस आने वाले समय में डिजिटल, रिटेल और ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित लिस्टिंग, नई ऊर्जा परियोजनाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश कंपनी को नई पहचान दे सकते हैं।
रिलायंस अब सिर्फ तेल और पेट्रोकेमिकल्स की कंपनी नहीं रही। यह धीरे-धीरे एक टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर फोकस्ड कंपनी के रूप में खुद को स्थापित कर रही है।
