रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाले कई सालों तक याद रखा जाएगा, क्योंकि यह पहली बार हुआ है जब किसी हिंदी फिल्म ने भारत में ₹1000 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार किया हो और इसी के साथ यह अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। फिल्म की रिलीज़ के समय किसी ने शायद यह अंदाजा नहीं लगाया था कि यह इतनी लंबी दौड़ तय करेगी, लेकिन पहले दिन से लेकर आज तक ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी और धीरे-धीरे एक ऐतिहासिक फिल्म बन गई। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने शुरुआत में शानदार ओपनिंग की, लेकिन इसकी असली ताकत इसके कंटेंट और दर्शकों की प्रतिक्रिया में देखने को मिली, क्योंकि फिल्म सिर्फ पहले हफ्ते तक सीमित नहीं रही बल्कि हफ्तों तक सिनेमाघरों में मजबूती से टिकी रही। आमतौर पर देखा जाता है कि बड़ी फिल्में शुरुआती दिनों में ज्यादा कमाई करती हैं और फिर उनकी रफ्तार धीमी हो जाती है, लेकिन ‘धुरंधर’ के साथ ऐसा नहीं हुआ, इस फिल्म ने धीरे-धीरे कमाई की और हर हफ्ते नए दर्शकों को थिएटर तक खींचा। भारत में ₹1000 करोड़ से ज्यादा की ग्रॉस कमाई और दुनिया भर में ₹1300 करोड़ से ऊपर का कारोबार यह दिखाता है कि फिल्म को सिर्फ घरेलू बाजार में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भरपूर प्यार मिला। खास बात यह रही कि यह फिल्म केवल हिंदी भाषा में रिलीज़ हुई थी, न तो इसका कोई बड़ा डब वर्जन था और न ही मल्टी-लैंग्वेज रिलीज़ का सहारा लिया गया, इसके बावजूद फिल्म ने इतने बड़े आंकड़े को छू लिया, जो हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लंबे समय से यह कहा जा रहा था कि हिंदी फिल्मों का दर्शक थिएटर से दूर हो रहा है और बड़े रिकॉर्ड अब सिर्फ साउथ इंडियन फिल्मों तक सीमित रहेंगे, लेकिन ‘धुरंधर’ ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया और यह दिखा दिया कि अगर फिल्म की कहानी मजबूत हो और उसे ईमानदारी से पेश किया जाए, तो हिंदी दर्शक आज भी बड़ी संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचते हैं। इस फिल्म की सफलता में रणवीर सिंह की भूमिका सबसे अहम रही, क्योंकि उन्होंने इसमें एक गंभीर, जिम्मेदार और मजबूत किरदार निभाया, जो उनके पहले के कई रोल्स से अलग था। रणवीर सिंह को अक्सर उनकी एनर्जी और अलग-अलग अंदाज के लिए जाना जाता है, लेकिन ‘धुरंधर’ में उन्होंने संयमित और सधे हुए अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया और यह साबित किया कि वह हर तरह के किरदार में खुद को ढाल सकते हैं।

फिल्म में उनका किरदार सिर्फ एक एक्शन हीरो का नहीं था, बल्कि एक ऐसे इंसान का था जो देश, जिम्मेदारी और अपने कर्तव्य के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है, और यही बात दर्शकों को उनसे जोड़ती चली गई। कहानी में देश की सुरक्षा, पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की जिंदगी और उनके बलिदान को बहुत सीधे और आसान तरीके से दिखाया गया है, बिना किसी भारी संवाद या जटिल शब्दों के, जिससे हर उम्र और हर वर्ग का दर्शक इसे समझ सका। फिल्म में एक्शन जरूर है, लेकिन वह दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि कहानी की जरूरत के हिसाब से आता है, और यही वजह है कि दर्शक फिल्म के साथ आखिर तक जुड़े रहते हैं। रणवीर सिंह के अलावा फिल्म की बाकी स्टारकास्ट ने भी कहानी को मजबूती दी, हर कलाकार ने अपने किरदार को सच्चाई के साथ निभाया और किसी भी जगह यह नहीं लगा कि कोई रोल बेवजह डाला गया हो। फिल्म का निर्देशन भी इसकी सफलता का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि कहानी को न तो बहुत तेज भगाया गया और न ही बेवजह खींचा गया, बल्कि एक संतुलन के साथ आगे बढ़ाया गया, जिससे दर्शकों को हर सीन का मतलब समझ में आता रहा। ‘धुरंधर’ की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह फिल्म सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी इसे खूब पसंद किया गया, जहां दर्शक लंबे समय से ऐसी फिल्मों का इंतजार कर रहे थे जो उनकी भाषा और भावनाओं से जुड़ सकें। सिंगल स्क्रीन थिएटरों में फिल्म का प्रदर्शन यह दिखाता है कि आम दर्शक भी इस फिल्म से जुड़ा और बार-बार इसे देखने पहुंचा। विदेशों में भी फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, खासकर उन जगहों पर जहां भारतीय दर्शकों की संख्या ज्यादा है, लेकिन इसके साथ-साथ वहां के स्थानीय दर्शकों ने भी फिल्म में दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि इसकी कहानी भावनाओं और इंसानी जज्बे से जुड़ी हुई थी। ‘धुरंधर’ की कमाई सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह हिंदी सिनेमा के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है, जिसने यह भरोसा दिलाया है कि बॉलीवुड अब भी बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखता है। इस फिल्म की सफलता के बाद इंडस्ट्री में यह चर्चा तेज हो गई है कि अब कंटेंट पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा और सिर्फ बड़े नाम या चमक-धमक के भरोसे फिल्में नहीं बनाई जाएंगी। दर्शकों ने साफ संदेश दे दिया है कि वे अच्छी कहानी, सच्चे अभिनय और मजबूत प्रस्तुति को पसंद करते हैं, और अगर फिल्म इन बातों पर खरी उतरती है तो वे उसे दिल खोलकर अपनाते हैं। ‘धुरंधर’ आने वाले समय में हिंदी फिल्मों के लिए एक उदाहरण बनेगी, क्योंकि इसने यह साबित कर दिया है कि बिना किसी अतिरिक्त सहारे के भी एक हिंदी फिल्म इतिहास रच सकती है। यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के लिए याद की जाएगी, बल्कि उस बदलाव के लिए भी जानी जाएगी, जिसने हिंदी सिनेमा को एक नई दिशा दी है। ₹1000 करोड़ की यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन फिल्म ने धैर्य, भरोसे और दर्शकों के प्यार के दम पर यह मुकाम हासिल किया, और यही वजह है कि ‘धुरंधर’ को सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक खास अध्याय माना जा रहा है।