फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला सीधे भारत के सबसे सम्मानित संगीतकार ए.आर. रहमान से जुड़ा है, जिनका नाम सुनते ही भारतीय संगीत की वैश्विक पहचान सामने आ जाती है। ऑस्कर विजेता गीत ‘जय हो’ को लेकर राम गोपाल वर्मा के एक बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी। कई लोगों ने इसे ए.आर. रहमान के योगदान को कम आंकने वाला बयान बताया, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया। लेकिन अब राम गोपाल वर्मा ने खुद सामने आकर अपने बयान पर सफाई दी है और ए.आर. रहमान की खुलकर तारीफ की है।
राम गोपाल वर्मा ने साफ किया कि उनका इरादा कभी भी ए.आर. रहमान के सम्मान या प्रतिभा पर सवाल उठाने का नहीं था। उन्होंने कहा कि रहमान न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के सबसे महान संगीतकारों में से एक हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ए.आर. रहमान सिर्फ एक शानदार कंपोज़र ही नहीं, बल्कि एक बेहद विनम्र और अच्छे इंसान भी हैं। वर्मा के मुताबिक, उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया गया और बात को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
दरअसल, ‘जय हो’ गीत 2009 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ का हिस्सा था, जिसने ऑस्कर में इतिहास रच दिया। इस फिल्म के संगीत के लिए ए.आर. रहमान को दो ऑस्कर अवॉर्ड मिले थे, जिनमें बेस्ट ओरिजिनल स्कोर और बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग शामिल थे। ‘जय हो’ न सिर्फ एक गाना था, बल्कि भारत की संगीत प्रतिभा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्सव बन गया। ऐसे में इस गाने के कंपोज़र को लेकर कोई भी टिप्पणी स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हो जाती है।
राम गोपाल वर्मा के शुरुआती बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे ए.आर. रहमान के योगदान को कम करने की कोशिश बताया, जबकि कुछ लोगों ने वर्मा की पुरानी आदतों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अक्सर विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर बहस तेज हो गई। कुछ फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि ए.आर. रहमान जैसे कलाकार पर सवाल उठाना भारतीय संगीत का अपमान है।
हालांकि, विवाद बढ़ता देख राम गोपाल वर्मा ने खुद आगे आकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि ‘जय हो’ को लेकर जो भी बात उन्होंने कही थी, उसे गलत तरीके से समझा गया। उनका मकसद यह बताना नहीं था कि ए.आर. रहमान ने उस गाने को कंपोज़ नहीं किया, बल्कि वह किसी और संदर्भ में बात कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि रहमान की प्रतिभा पर सवाल उठाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
वर्मा ने अपने स्पष्टीकरण में ए.आर. रहमान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा और संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि रहमान का संगीत सिर्फ सुनाई नहीं देता, बल्कि महसूस होता है। उनके गाने दिल से निकलते हैं और सीधे दिल तक पहुंचते हैं। वर्मा ने यह भी कहा कि रहमान जैसे कलाकार बहुत कम होते हैं, जो सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी जमीन से जुड़े रहते हैं।
सोशल मीडिया पर इस सफाई के बाद भी प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। कुछ लोगों ने राम गोपाल वर्मा की बात को स्वीकार किया और कहा कि गलतफहमी हो सकती है। वहीं, कुछ यूजर्स का मानना था कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर बोलते समय सार्वजनिक हस्तियों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए। कई लोगों ने यह भी कहा कि ए.आर. रहमान की लोकप्रियता और सम्मान इतना बड़ा है कि उनके नाम से जुड़ा कोई भी विवाद तुरंत लोगों की भावनाओं को छू जाता है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आज के डिजिटल दौर में किसी भी बयान का असर कितनी तेजी से फैलता है। एक छोटी-सी बात भी बड़ा विवाद बन सकती है, खासकर जब बात किसी ऐसे व्यक्ति की हो जिसने देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया हो। ए.आर. रहमान न सिर्फ एक संगीतकार हैं, बल्कि एक भावना हैं, जिनसे करोड़ों लोगों की यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
राम गोपाल वर्मा का यह कहना कि ए.आर. रहमान ‘सबसे महान संगीतकार और सबसे अच्छे इंसान’ हैं, उनके सम्मान को दर्शाता है। हालांकि, यह भी सच है कि सार्वजनिक मंच पर कही गई हर बात की जिम्मेदारी वक्ता की होती है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि शब्दों का चयन कितना अहम होता है और खासकर कला और कलाकारों से जुड़े विषयों पर बोलते समय संवेदनशीलता जरूरी है।
विवाद कितना भी बड़ा क्यों न हो, ए.आर. रहमान की विरासत और योगदान पर कोई असर नहीं पड़ता। उनका संगीत आज भी लोगों के दिलों में बसा है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। वहीं, राम गोपाल वर्मा की सफाई के बाद यह उम्मीद की जा सकती है कि यह विवाद यहीं थम जाएगा और चर्चा फिर से उस संगीत पर लौटेगी, जिसने भारत को ऑस्कर तक पहुंचाया।






