Taza Junction News

Nicholas Pooran की अनोखी रणनीति: आसान स्टंपिंग छोड़कर Retired Out का रास्ता क्यों चुना गया

क्रिकेट में कई पल ऐसे आते हैं जो सिर्फ खेल नहीं बल्कि उसकी सोच, रणनीति और नैतिकता पर भी सवाल खड़े कर जाते हैं। ILT20 2025 के दौरान ऐसा ही एक क्षण देखने को मिला जब MI Emirates के खिलाफ मैदान पर खड़े विकेटकीपर Nicholas Pooran ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया। आम तौर पर विकेटकीपर का काम होता है बल्लेबाज़ को मौका मिलने पर तुरंत स्टंप कर देना, लेकिन इस मैच में पूरन ने ऐसा नहीं किया। आसान स्टंपिंग की स्थिति में भी उन्होंने गेंद पकड़ी और शांत खड़े रहे। उनके इस कदम ने अचानक खेल की दिशा के साथ ही बहस का माहौल भी बदल दिया।

घटना कैसे शुरू हुई: मैदान पर पैदा हुई हैरानी

16वें ओवर की आखिरी गेंद पर बल्लेबाज़ Max Holden आगे निकलकर शॉट खेलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन गेंद उनके बल्ले से दूर निकल गई। वे क्रीज़ से काफी बाहर खड़े थे, जबकि गेंद सीधे और सुरक्षित रूप से विकेटकीपर Nicholas Pooran के दस्तानों में जा चुकी थी। इस दृश्य को देखकर दर्शकों, कमेंटेटर्स और डगआउट में बैठे खिलाड़ियों को एक ही परिणाम की प्रतीक्षा थी— स्टंपिंग के माध्यम से आउट।

लेकिन पूरन ने ऐसा नहीं किया। न विकेट पर चोट की, न अपील की और न ही बल्लेबाज़ को वापस लौटने से रोका। इस फैसले ने पल भर में ही सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर उन्होंने यह निर्णय क्यों लिया, जबकि क्रिकेट में ऐसा मौका शायद ही छोड़ने जैसा होता है।

अगले ओवर में अचानक लिया गया Retired Out का फैसला

पूरन के स्टंपिंग न करने के निर्णय का असल कारण अगले ही ओवर में सामने आ गया, जब बल्लेबाज़ Max Holden को Retired Out घोषित कर दिया गया। आमतौर पर खेल में यह स्थिति तब दिखाई देती है, जब खिलाड़ी घायल हो जाए या शारीरिक समस्या के कारण बल्लेबाज़ी जारी न रख सके। लेकिन यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं था। Holden पूरी तरह फिट थे, परंतु टीम ने रणनीति के तहत उन्हें बाहर भेज दिया। यह निर्णय साफ तौर पर रन गति को बढ़ाने के लिए लिया गया था।

अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाने की आवश्यकता थी, और Max Holden उस रफ्तार के साथ रन नहीं जुटा पा रहे थे। टीम ने उनके स्थान पर अधिक आक्रामक और तेज स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज़ों को भेजा, जिससे स्कोर में तेजी से बढ़त मिली और मैच का संतुलन पलभर में बदल गया।

क्या यह रणनीति थी या खेल भावना के विपरीत निर्णय

इस घटना ने क्रिकेट के दर्शकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कुछ लोगों का मानना था कि Nicholas Pooran का निर्णय खेल की आत्मा के विरुद्ध था क्योंकि उन्होंने एक बल्लेबाज़ को जानबूझकर बचने दिया, सिर्फ इसलिए कि विपक्ष Retired Out की रणनीति लागू न कर पाए। वहीं दूसरी ओर आधुनिक T20 के समर्थकों का कहना है कि यह खेल नहीं बल्कि रणनीति आधारित युद्ध है, जहाँ हर गेंद और हर रन की अपनी कीमत होती है।

T20 क्रिकेट अब पारंपरिक क्रिकेट की तुलना में अधिक तेज, अधिक प्रयोगशील और अधिक चतुराई से भरा स्वरूप बन चुका है। इस दृष्टि से देखा जाए तो पूरन का यह कदम पूरी तरह आवश्यक, बुद्धिमानी भरा और आधुनिक क्रिकेट की सोच के अनुरूप कहा जा सकता है।

नियम क्या कहते हैं: स्टंपिंग करना अनिवार्य नहीं

क्रिकेट के नियम पुस्तिका में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया कि विकेटकीपर को हर स्थिति में स्टंपिंग करना ही होगा। उसके पास यह अधिकार रहता है कि वह स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने अनुसार फैसले ले। Nicholas Pooran ने ठीक इसी नियम का उपयोग करते हुए इसे टीम की रणनीति के लाभ में बदल दिया। वह जानते थे कि अगर वे स्टंप कर देते, तो विपक्ष बल्लेबाज़ को रणनीतिक तरीके से हटाकर अगले ओवरों में आक्रमणात्मक बल्लेबाज़ी की रणनीति नहीं अपना पाएगा।

T20 का बदलता चेहरा: पारंपरिक सोच से दूर नई रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में T20 क्रिकेट में ऐसे कई बदलाव देखने को मिले हैं, जहाँ कप्तान और विकेटकीपर सिर्फ खेल नहीं बल्कि मानसिक और तकनीकी रणनीतियों के आधार पर निर्णय लेते हैं। अब लक्ष्य तेजी से रन बनाने, समय बचाने, पारी का संतुलन साधने और विपक्ष को मानसिक रूप से दबाव में लाने जैसी बातों पर अधिक केंद्रित हो गया है। यही कारण है कि Retired Out अब सिर्फ नियम नहीं बल्कि लाइव रणनीतिक हथियार की तरह प्रयोग में आने लगा है।

क्या भविष्य में इस तरह के निर्णय आम हो जाएंगे

Pooran के इस निर्णय के बाद यह बहस शुरू हो चुकी है कि यदि आगे भी टीमों ने इसी तरह की रणनीति अपनानी शुरू कर दी, तो खेल की मूल भावना और पारंपरिक रूप कहीं पीछे छूट सकता है। साथ ही यह भी संभव है कि आने वाले समय में ICC और विभिन्न लीग्स को इस विषय पर और स्पष्ट नियम लागू करने पड़ें। Retired Out को लेकर और स्टंपिंग जैसे जानबूझकर छोड़े गए मौकों पर नए दिशानिर्देश तय किए जा सकते हैं, ताकि खेल की नैतिकता और रणनीति के बीच संतुलन कायम रह सके।

निष्कर्ष: पूरन मास्टरस्ट्रोक या विवाद का चेहरा

Nicholas Pooran का यह निर्णय क्रिकेट के सबसे अनोखे फैसलों में से एक माना जा सकता है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक T20 क्रिकेट अब सिर्फ बैट और बॉल की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दिमाग, धैर्य और रणनीतिक सोच की असली परख भी है। चाहे इसे आलोचना के रूप में देखा जाए या प्रशंसा के रूप में, यह घटना आने वाले लंबे समय तक क्रिकेट के बदलते स्वरूप का उदाहरण बनी रहेगी।

पूरन ने एक आसान मौका छोड़कर यह साबित कर दिया कि कभी-कभी जीत सिर्फ विकेट लेने से नहीं, बल्कि समय और स्थिति के अनुसार सही रणनीति लागू करने से मिलती है। यही कारण है कि इस घटना को T20 क्रिकेट के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

Exit mobile version