Myanmar Earthquake, 5.9 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, कोलकाता में दहशत

Myanmar Earthquake

म्यांमार में मंगलवार देर शाम रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसके झटके भारत के पूर्वी हिस्से तक महसूस किए गए। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, उसके आसपास के जिलों और बांग्लादेश के कई इलाकों में अचानक ज़मीन हिलने से लोग सहम गए। कई लोगों ने बताया कि कुछ सेकंड तक घरों की दीवारें, पंखे और फर्नीचर हिलते हुए महसूस हुए, जिसके बाद लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। हालांकि भूकंप की तीव्रता मध्यम श्रेणी की थी, लेकिन इसकी गहराई कम होने के कारण इसका असर काफी दूर तक देखने को मिला। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या हताहत होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने लोगों को कुछ देर के लिए डर और असमंजस में जरूर डाल दिया।

भूकंप का केंद्र म्यांमार के मध्य क्षेत्र में बताया जा रहा है, जो भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के प्रभाव क्षेत्र में आता है, जहां लगातार भूगर्भीय हलचल बनी रहती है। इसी वजह से म्यांमार और इसके आसपास के क्षेत्रों में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। इस बार भूकंप की तीव्रता 5.9 रही, जिसे रिक्टर स्केल पर मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। ऐसे भूकंप आमतौर पर बड़े पैमाने पर तबाही नहीं लाते, लेकिन अगर आबादी घनी हो या इमारतें कमजोर हों, तो नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण झटके महसूस होते ही लोग सतर्क हो गए और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।

Myanmar Earthquake
Myanmar Earthquake

कोलकाता में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतने साफ झटके महसूस नहीं किए थे। कुछ लोगों को लगा जैसे बिस्तर हिल रहा हो, तो कुछ ने अलमारियों और दरवाजों में कंपन महसूस किया। सोशल मीडिया पर भी भूकंप को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कई यूज़र्स ने अपने अनुभव साझा किए। हालांकि प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है और किसी तरह की आपात स्थिति घोषित नहीं की गई है, लेकिन अधिकारी भूकंप के बाद आने वाले संभावित आफ्टरशॉक्स पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भूकंप एक तरह की चेतावनी होते हैं, जो यह याद दिलाते हैं कि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी और बिना सूचना के आ सकती हैं। भारत के कई हिस्से, खासकर पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र, भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग भूकंप के दौरान और बाद में क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी रखें। मजबूत निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारी और आम लोगों में जागरूकता ही ऐसे हालात में जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है। म्यांमार में आए इस भूकंप से भले ही कोई बड़ी तबाही नहीं हुई हो, लेकिन इसने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *