भारतीय म्यूजिक रियलिटी शो इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो सिर्फ जीतकर नहीं, बल्कि दिल जीतकर अमर हो जाते हैं। इंडियन आइडल सीजन-3 के विजेता प्रशांत तमांग उन्हीं में से एक थे। 2007 में जब हज़ारों सपनों के बीच यह दुबला-पतला, शांत चेहरा मंच पर आता था, तो दर्शक शायद नहीं जानते थे कि यह आवाज़ लाखों दिलों में जगह बना लेगी। लेकिन आज, 11 जनवरी 2026 को 43 वर्ष की आयु में प्रशांत तमांग के निधन की खबर ने पूरे संगीत जगत को शोक में डुबो दिया है।
दिल्ली में आए अचानक कार्डियक अरेस्ट ने इस उम्दा कलाकार की ज़िंदगी को समय से पहले रोक दिया। यह खबर जितनी अविश्वसनीय है, उतनी ही पीड़ादायक भी, क्योंकि प्रशांत तमांग सिर्फ एक सिंगर नहीं — संघर्ष, मेहनत और सादगी के प्रतीक थे।

शो के दौरान दर्शकों ने उनकी आवाज़ में कच्ची ईमानदारी महसूस की — वह आवाज़ जो किसी मेहमान कलाकार की ट्रेनिंग से नहीं, जिंदगी की धड़कनों से बनती है। शायद यही कारण था कि लाखों वोटों ने उन्हें इंडियन आइडल का ताज दिलाया, और वे पूर्वोत्तर और नेपाली समुदाय के लिए गौरव का प्रतीक बन गए।
जीत ने खोले नए दरवाज़े
विजय के बाद प्रशांत तमांग ने एक-एक कदम सलीके से बढ़ाया। उन्होंने अपना पहला एल्बम जारी किया, देश और विदेश में कॉन्सर्ट किए और उन दर्शकों से मिले जिन्होंने मोबाइल फोन पर वोट करके उन्हें स्टार बनाया था। जल्द ही उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रखा। नेपाली फिल्मों में अपने काम से उन्होंने साबित किया कि वे सिर्फ सुरों के नहीं, परदों के भी सितारे थे।
अपनी विनम्रता बरकरार रखते हुए प्रशांत ने अभिनय की सीमाओं को भी पार किया। हाल ही में OTT प्लेटफॉर्म की मशहूर सीरीज पाताल लोक में वे नज़र आए, जहां दर्शकों और समीक्षकों ने एक बार फिर उन्हें सराहा। ऐसा लगा मानो एक नया अध्याय खुल रहा है — लेकिन ज़िंदगी ने वह कहानी अचानक रोक दी।
अंतिम विदाई, अंतिम झटका
दिल्ली स्थित घर में अचानक तबीयत बिगड़ना और अस्पताल तक पहुंचने से पहले जीवन की डोर टूट जाना, हर उस शख्स को सुन्न कर गया जिसने कभी उनका नाम सुना हो। खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथी गायक और दोस्त अमित पॉल का भावुक संदेश हर उस इंसान के दिल की आवाज़ था जिसे प्रशांत से लगाव था।
दार्जिलिंग, सिक्किम, दक्खिन भारत, नेपाल और विदेशों में बसे नेपाली समुदायों ने उन्हें सिर्फ कलाकार नहीं, अपना बेटा माना। उनके निधन ने इन इलाकों में ऐसी खामोशी छोड़ दी है जो लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
क्यों याद रहेंगे प्रशांत तमांग
प्रशांत तमांग ने अपने सफर से एक सशक्त संदेश छोड़ा — प्रतिभा को मंच की जरूरत होती है, लेकिन मंच दिलों की नहीं, दिलों की पहचान मंचों को मिलता है। उन्होंने दिखाया कि आम आदमी भी असाधारण बन सकता है। उनका संगीत किसी स्टारडम की चमक नहीं, मेहनत की चमक लिए हुए था। उनकी मुस्कान ने कभी फिजूल शोर नहीं मचाया — पर हमेशा कानों से ज़्यादा दिल तक गई।
उनका जीवन शायद छोटा रहा, लेकिन उनकी उपलब्धियाँ समय से बड़ी थीं। एक कॉन्स्टेबल से इंडियन आइडल विजेता, एक म्यूजिक स्टार से फिल्म और वेब सीरीज एक्टर — यह वह कहानी है जिसे किसी भी युवा के नज़र में उम्मीद बन कर रहना चाहिए।
अंत नहीं, विरासत है
प्रशांत तमांग का जाना दुखद है, लेकिन उनका सफर हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो अपनी प्रतिभा को सच में जीना चाहता है। उनका संगीत, उनके किरदार और उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगा। दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर दिल्ली की रौशनी तक, उन्होंने हर कदम पर साबित किया कि सपने सच होते हैं — बस चलना बंद मत करो।
आज वह मंच खाली है जिसे कभी प्रशांत की आवाज़ ने भर दिया था। लेकिन उनकी गूंज हमेशा महसूस होगी — गीतों में, फिल्मों में, यादों में और उन लाखों दिलों में जिन्हें उन्होंने छुआ था।
एक सितारा जो जल्दी चला गया,
लेकिन उसकी रोशनी कभी नहीं बुझने वाली।