आज का समय पूरी तरह डिजिटल लेनदेन का हो चुका है। डेबिट और क्रेडिट कार्ड अब सिर्फ सुविधा का साधन नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन गए हैं। किराने की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, होटल बुकिंग, मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान तक—हर जगह कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। लेकिन इसी बढ़ते इस्तेमाल के साथ एक बड़ा खतरा भी तेजी से सामने आया है, और वह है कार्ड फ्रॉड। देश में हर दिन हजारों लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं, जिनमें से कई लोगों को तब तक अंदाजा भी नहीं होता जब तक उनके अकाउंट से पैसे गायब नहीं हो जाते। यही वजह है कि आज के दौर में डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुरक्षा पर जागरूक रहना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
कार्ड फ्रॉड दरअसल एक ऐसी धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी आपकी जानकारी के बिना आपके कार्ड से ट्रांजैक्शन कर देता है। कई बार यह धोखाधड़ी फोन कॉल के जरिए होती है, जहां ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर OTP या कार्ड डिटेल मांगते हैं, तो कई बार नकली वेबसाइट या फर्जी लिंक के जरिए आपकी निजी जानकारी चुरा ली जाती है। हैरानी की बात यह है कि ये फर्जी वेबसाइट और कॉल इतनी प्रोफेशनल लगती हैं कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी धोखे में आ सकता है। एक छोटी सी लापरवाही, जैसे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना या जल्दबाजी में OTP बता देना, आपके बैंक अकाउंट को खाली कर सकती है।
अगर कार्ड को सुरक्षित रखना है तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बैंक कभी भी आपसे फोन या मैसेज पर OTP, CVV या PIN नहीं मांगता। इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे कॉल्स पर भरोसा कर लेते हैं और बाद में पछताते हैं। साइबर अपराधी डर या लालच दोनों का इस्तेमाल करते हैं—कभी कहते हैं कि आपका कार्ड बंद हो जाएगा, तो कभी रिवॉर्ड प्वाइंट या कैशबैक का लालच देते हैं। ऐसे किसी भी कॉल या मैसेज से तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और बिना सोचे-समझे कोई भी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

ऑनलाइन पेमेंट करते समय भी थोड़ी समझदारी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। हमेशा भरोसेमंद और सुरक्षित वेबसाइट से ही खरीदारी करें। अगर वेबसाइट का एड्रेस https से शुरू नहीं होता या कुछ संदिग्ध लगता है, तो वहां कार्ड डिटेल डालने से बचें। पब्लिक Wi-Fi पर ऑनलाइन पेमेंट करना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि यहां डेटा चोरी होने की संभावना ज्यादा रहती है। आजकल बैंक ऐप में कार्ड को ऑन-ऑफ करने, लिमिट सेट करने और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन बंद रखने जैसी सुविधाएं दी जाती हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप खुद अपनी सुरक्षा मजबूत कर सकते हैं।
कार्ड से जुड़ी हर छोटी गतिविधि पर नजर रखना भी बेहद जरूरी है। ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू होने से जैसे ही कोई लेनदेन होता है, आपको तुरंत जानकारी मिल जाती है। इससे अगर कोई गलत ट्रांजैक्शन हो भी जाए, तो समय रहते एक्शन लिया जा सकता है। ATM या दुकान पर कार्ड इस्तेमाल करते समय भी सतर्क रहना जरूरी है। PIN डालते वक्त कीपैड को ढकना, अनजान लोगों की मदद न लेना और POS मशीन पर कार्ड स्वाइप करते समय ध्यान बनाए रखना छोटी बातें जरूर हैं, लेकिन यही आदतें आपको फ्रॉड से बचाती हैं।
अगर दुर्भाग्य से आपके साथ कार्ड फ्रॉड हो जाता है, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना सबसे अहम होता है। सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क कर कार्ड ब्लॉक करवाना चाहिए, ताकि आगे कोई ट्रांजैक्शन न हो सके। इसके बाद बैंक में शिकायत दर्ज करानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर साइबर क्राइम पोर्टल पर भी रिपोर्ट करनी चाहिए। कई मामलों में समय पर शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना भी रहती है, इसलिए देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इनके सुरक्षित इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। थोड़ी सी जागरूकता, सही जानकारी और सतर्कता से हम खुद को साइबर ठगी से बचा सकते हैं। डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस जरूरत है समझदारी से कदम उठाने की।