रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना की फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा सफर तय किया है, जो आज के समय में बहुत कम फिल्मों को नसीब होता है। रिलीज़ के 48वें दिन भी यह फिल्म चर्चा में बनी हुई है और इसकी सबसे बड़ी वजह है सातवें हफ्ते में किया गया वो कारनामा, जिसने ‘स्त्री 2’ जैसी बड़ी फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ दिया। आमतौर पर फिल्में पांचवें या छठे हफ्ते तक आते-आते सिनेमाघरों से गायब होने लगती हैं, लेकिन ‘धुरंधर’ ने यह साबित कर दिया कि अगर कहानी और अभिनय मजबूत हो, तो दर्शक लंबे समय तक साथ निभाते हैं। हालांकि अब, जब फिल्म अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है और ‘बॉर्डर 2’ जैसी बड़ी रिलीज़ नजदीक है, तो कलेक्शन की रफ्तार में हल्की सुस्ती जरूर देखने को मिल रही है।
अगर पूरे बॉक्स ऑफिस सफर को देखा जाए, तो ‘धुरंधर’ की शुरुआत भले ही बहुत आक्रामक न रही हो, लेकिन फिल्म ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की। पहले हफ्ते में अच्छी ओपनिंग के बाद दूसरे और तीसरे हफ्ते में फिल्म ने स्थिर कमाई की, जिससे ट्रेड को यह संकेत मिल गया था कि यह फिल्म लंबी रेस की खिलाड़ी है। चौथे और पांचवें हफ्ते में जब कई नई फिल्में रिलीज़ हुईं, तब भी ‘धुरंधर’ का टिके रहना इसकी सबसे बड़ी जीत बनकर सामने आया। सातवें हफ्ते में आकर जब फिल्म ने ‘स्त्री 2’ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा, तब यह साफ हो गया कि यह सफलता सिर्फ स्टार पावर की नहीं, बल्कि दर्शकों के भरोसे की है। लोग इसे बार-बार देखने पहुंचे, परिवार और दोस्तों को इसके बारे में बताया और यही वर्ड ऑफ माउथ फिल्म के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ।
डे 48, बुधवार फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई और शाम तक ₹0.84 करोड़ ही कमाई हुई। इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई अब ₹829.09 करोड़ पहुँच गई है। इसके बावजूद, ‘धुरंधर’ ने सातवें हफ्ते का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो पहले ‘स्त्री 2’ के नाम था। इसके अलावा, ‘बॉर्डर 2’ को लेकर जो माहौल बना हुआ है, उसने भी दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
फिल्म की सफलता में रणवीर सिंह के अभिनय का बड़ा योगदान रहा है। इस बार रणवीर ने अपने एनर्जी से भरे, ओवर-द-टॉप अंदाज़ से हटकर एक गंभीर और संयमित किरदार निभाया है। उनका अभिनय न तो बनावटी लगता है और न ही जरूरत से ज्यादा भावुक। दर्शकों को उनके किरदार में सच्चाई नजर आती है, जो फिल्म से जुड़ाव पैदा करती है। वहीं, अक्षय खन्ना ने एक बार फिर यह साबित किया कि कम स्क्रीन टाइम में भी गहरी छाप छोड़ी जा सकती है। उनका शांत लेकिन मजबूत अभिनय फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है और कहानी को मजबूती देता है।

‘धुरंधर’ की असली ताकत इसकी कहानी और निर्देशन है। फिल्म बिना शोर मचाए, बिना फालतू गानों और जबरदस्ती की कॉमेडी के अपनी बात कहती है। निर्देशक ने दर्शकों की समझ पर भरोसा किया है और यही वजह है कि फिल्म हर उम्र के लोगों को पसंद आई। यह फिल्म बताती है कि आज भी दर्शक अच्छी कहानी देखना चाहते हैं, बस उसे ईमानदारी से पेश किया जाना चाहिए। म्यूजिक भले ही चार्टबस्टर न बना हो, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर हर सीन के साथ घुल-मिलकर कहानी को और प्रभावशाली बनाता है।
अब जब ‘धुरंधर’ अपने सफर के अंतिम पड़ाव पर है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर एक मिसाल कायम की है। सातवें हफ्ते में रिकॉर्ड तोड़ना और 48 दिनों तक सिनेमाघरों में टिके रहना अपने आप में बड़ी बात है। भले ही अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई हो, लेकिन कंटेंट के दम पर मिली यह सफलता लंबे समय तक याद रखी जाएगी। ‘धुरंधर’ यह साबित करती है कि सच्ची मेहनत, मजबूत कहानी और ईमानदार अभिनय आज भी दर्शकों का दिल जीत सकता है, और यही इसे 2026 की यादगार फिल्मों में शामिल करता है।