आज के समय में लोन लेना हो, घर खरीदना हो, गाड़ी फाइनेंस करानी हो या फिर पर्सनल लोन की जरूरत पड़े—हर जगह सबसे पहले आपका CIBIL स्कोर देखा जाता है। कई लोग अच्छी सैलरी होने के बावजूद सिर्फ खराब क्रेडिट स्कोर की वजह से लोन से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर CIBIL को सही और मजबूत रखना है तो आखिर क्रेडिट कार्ड कितना प्रतिशत इस्तेमाल करना चाहिए? क्या पूरी लिमिट खर्च कर देने से स्कोर गिर जाता है? क्या कम खर्च करने से फायदा होता है? इन सभी सवालों का जवाब इस लेख में आसान और स्पष्ट शब्दों में समझिए।
CIBIL स्कोर क्या है और क्यों है इतना जरूरी?
CIBIL स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर तय किया जाता है। भारत में यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। 750 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है और 800 से ऊपर का स्कोर बेहतरीन। बैंक और वित्तीय संस्थान इसी स्कोर के आधार पर तय करते हैं कि आपको लोन देना सुरक्षित है या नहीं। अगर आपका स्कोर मजबूत है तो न सिर्फ लोन जल्दी मिलता है बल्कि कम ब्याज दर पर भी मिलता है। वहीं स्कोर खराब होने पर लोन रिजेक्ट हो सकता है या ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है।
Credit Utilization Ratio क्या होता है?
जब भी बात क्रेडिट कार्ड के उपयोग की होती है तो एक शब्द बार-बार सामने आता है—Credit Utilization Ratio। इसका मतलब है आपकी कुल क्रेडिट लिमिट में से आप कितना प्रतिशत इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है और आपने 30 हजार रुपये खर्च किए हैं, तो आपका उपयोग 30% हुआ। यही प्रतिशत आपके CIBIL स्कोर पर बड़ा असर डालता है। बैंक इसे इस नजर से देखते हैं कि आप अपनी उपलब्ध क्रेडिट पर कितना निर्भर हैं।

आखिर कितना प्रतिशत इस्तेमाल करना चाहिए?
विशेषज्ञों की राय के अनुसार, आपको अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का 30% या उससे कम उपयोग करना चाहिए। यही सबसे सुरक्षित सीमा मानी जाती है। अगर आपकी लिमिट 1 लाख रुपये है तो कोशिश करें कि 30 हजार रुपये से ज्यादा का बकाया बिल स्टेटमेंट में न दिखे। 10 से 20 प्रतिशत उपयोग करना और भी बेहतर माना जाता है। इससे बैंक को संकेत मिलता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर रहे हैं और आप पर वित्तीय दबाव नहीं है।
30% से ज्यादा उपयोग करने पर क्या होता है?
अगर आप हर महीने 50%, 70% या पूरी लिमिट तक कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो भले ही आप समय पर भुगतान कर दें, फिर भी आपके स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कारण यह है कि ज्यादा उपयोग यह दर्शाता है कि आप क्रेडिट पर निर्भर हैं। लगातार हाई उपयोग से बैंक को जोखिम ज्यादा नजर आता है। अगर कभी किसी महीने भुगतान लेट हो गया तो स्कोर और तेजी से गिर सकता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि लिमिट का छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल करें।
क्या 0% उपयोग करना सबसे अच्छा है?
कई लोग सोचते हैं कि अगर वे कार्ड इस्तेमाल ही नहीं करेंगे तो स्कोर सुरक्षित रहेगा। यह पूरी तरह सही नहीं है। बिल्कुल उपयोग न करना भी अच्छा संकेत नहीं माना जाता। बेहतर यह है कि आप कभी-कभार कार्ड का उपयोग करें और समय पर पूरा भुगतान कर दें। इससे आपकी सक्रिय क्रेडिट हिस्ट्री बनती है और स्कोर मजबूत रहता है। लंबे समय तक कार्ड निष्क्रिय रहने से भविष्य में बैंक को आपकी भुगतान क्षमता का सही अंदाजा नहीं मिल पाता।
एक से ज्यादा कार्ड होने पर क्या करें?
अगर आपके पास दो या तीन क्रेडिट कार्ड हैं तो कुल लिमिट का 30% ध्यान में रखें। उदाहरण के लिए, अगर तीनों कार्ड की कुल लिमिट 3 लाख रुपये है तो कोशिश करें कि कुल बकाया 90 हजार रुपये से ज्यादा न हो। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि किसी एक कार्ड पर ही पूरा खर्च न डालें। संतुलित उपयोग बेहतर माना जाता है।
बिल जनरेट होने से पहले पेमेंट का फायदा
अगर किसी कारण से आपको ज्यादा खर्च करना पड़ा है और लिमिट का 40–50% उपयोग हो गया है, तो बिल जनरेट होने से पहले आंशिक भुगतान कर दें। जब स्टेटमेंट बनेगा तो कम बकाया दिखेगा और आपका Utilization Ratio नियंत्रित रहेगा। यह एक स्मार्ट तरीका है जिससे आप स्कोर पर असर पड़ने से बच सकते हैं।
Minimum Due का जाल
बहुत से लोग सिर्फ Minimum Due भरकर सोचते हैं कि उनका स्कोर सुरक्षित रहेगा। यह गलतफहमी है। Minimum Due भरने से लेट पेमेंट का रिकॉर्ड तो नहीं बनता, लेकिन बाकी रकम पर भारी ब्याज लगता है और अगर लगातार ऐसा करते रहे तो कर्ज बढ़ता जाएगा। बेहतर यही है कि हर महीने पूरा बकाया समय पर चुका दें।
लिमिट बढ़वाना क्या फायदेमंद है?
अगर आपकी आय बढ़ गई है और बैंक लिमिट बढ़ाने का ऑफर दे रहा है तो उसे स्वीकार करना समझदारी हो सकती है। लिमिट बढ़ने से आपका Utilization Ratio अपने-आप कम दिखेगा, बशर्ते खर्च वही रहे। उदाहरण के लिए, पहले आपकी लिमिट 1 लाख थी और खर्च 30 हजार था यानी 30% उपयोग। अगर लिमिट 2 लाख हो गई और खर्च वही 30 हजार रहा तो उपयोग सिर्फ 15% रह जाएगा, जो स्कोर के लिए बेहतर है।
बार-बार नए कार्ड या लोन के लिए आवेदन का असर
कई लोग ऑफर देखकर बार-बार नए कार्ड के लिए आवेदन कर देते हैं। हर आवेदन पर बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है, जिसे Hard Inquiry कहा जाता है। ज्यादा Hard Inquiry होने से भी स्कोर पर असर पड़ता है। इसलिए जरूरत हो तभी नया कार्ड या लोन अप्लाई करें।
इमरजेंसी में क्या करें?
कभी-कभी मेडिकल या पारिवारिक इमरजेंसी में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में अगर लिमिट 60–70% तक चली जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोशिश करें कि अगले एक-दो महीनों में बकाया कम कर दें और फिर से 30% के भीतर आ जाएं। लगातार हाई उपयोग ही असली समस्या बनता है।
CIBIL स्कोर पर और किन बातों का असर पड़ता है?
सिर्फ क्रेडिट कार्ड उपयोग ही नहीं, बल्कि समय पर भुगतान, पुराने अकाउंट की उम्र, क्रेडिट मिक्स और नए लोन की संख्या भी स्कोर को प्रभावित करते हैं। अगर आपका भुगतान इतिहास साफ है और आपने कभी EMI मिस नहीं की, तो स्कोर मजबूत बना रहता है। इसलिए अनुशासन और समय पर भुगतान सबसे बड़ा हथियार है।
संतुलन ही है असली कुंजी
अगर आप चाहते हैं कि भविष्य में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन आसानी से मिल जाए और कम ब्याज दर पर मिले, तो आज से ही क्रेडिट कार्ड का उपयोग समझदारी से करें। कोशिश करें कि कुल लिमिट का 30% या उससे कम ही इस्तेमाल करें। समय पर पूरा भुगतान करें, Minimum Due से बचें और अनावश्यक आवेदन न करें। याद रखिए, CIBIL स्कोर कोई जादुई संख्या नहीं है, बल्कि आपकी वित्तीय आदतों का आईना है। जितनी जिम्मेदारी से आप अपने कार्ड का उपयोग करेंगे, उतना ही मजबूत आपका स्कोर रहेगा और भविष्य की वित्तीय राह आसान होगी।










