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China Accuses US of Undermining India Ties: Pentagon LAC Report के बाद बढ़ा India-US-China Tension

China Accuses US of Undermining India Ties:

China Accuses US of Undermining India Ties:

वैश्विक राजनीति में एक बार फिर भारत-चीन-अमेरिका का त्रिकोण चर्चा के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन की हालिया सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के बाद चीन ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चीन का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर ऐसे बयान और रिपोर्ट जारी कर रहा है, जिनका उद्देश्य भारत और चीन के बीच संबंधों में अविश्वास पैदा करना और भारत-अमेरिका रिश्तों को अपने रणनीतिक हितों के अनुसार मोड़ना है।

यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब पेंटागन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हालिया स्थिति और चीन की रणनीति को लेकर टिप्पणी की। रिपोर्ट में कहा गया कि चीन, भारत के साथ सीमा पर तनाव कम दिखाकर, भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी आकलन पर चीन ने कड़ा ऐतराज जताया है।

पेंटागन रिपोर्ट में LAC को लेकर क्या कहा गया

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में भारत-चीन सीमा पर अपेक्षाकृत शांति देखी गई है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि यह शांति पूरी तरह स्थायी नहीं हो सकती और इसके पीछे रणनीतिक गणना हो सकती है।

पेंटागन का मानना है कि चीन क्षेत्रीय स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, ताकि भारत का झुकाव अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर ज्यादा न बढ़े। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत, चीन के इन कदमों को लेकर सतर्क बना हुआ है और सीमा पर हालात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

यहीं से विवाद की शुरुआत हुई, क्योंकि चीन ने इन टिप्पणियों को एकतरफा और भ्रामक बताया।

चीन की तीखी प्रतिक्रिया: “अमेरिका दरार पैदा करना चाहता है”

चीन के विदेश मंत्रालय ने पेंटागन की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका चीन की रक्षा नीति और चीन-भारत संबंधों को गलत तरीके से पेश कर रहा है। चीनी प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:

चीन और भारत के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे दो संप्रभु देशों का द्विपक्षीय विषय हैं, जिनमें किसी तीसरे देश को दखल देने का अधिकार नहीं है।

चीन का आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर ऐसे आकलन सामने ला रहा है जिससे भारत और चीन के बीच बनी संवाद प्रक्रिया प्रभावित हो और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़े। चीन ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और स्थिर रिश्तों के पक्ष में है।

भारत की भूमिका: संतुलन और रणनीतिक समझ

इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने कोई तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जो उसकी पारंपरिक कूटनीतिक शैली को दर्शाता है। भारत एक तरफ अमेरिका के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक बातचीत भी जारी रखे हुए है।

भारत की नीति स्पष्ट रही है कि वह किसी एक शक्ति खेमे का हिस्सा बनने के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखे। भारत के लिए LAC पर शांति बेहद जरूरी है, लेकिन साथ ही वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहता।

अमेरिका-भारत रिश्ते और चीन की चिंता

पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी तेज़ी से बढ़ी है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक तालमेल ने चीन की चिंता बढ़ाई है।

चीन को आशंका है कि अमेरिका भारत को एक रणनीतिक संतुलनकारी शक्ति के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को सीमित किया जा सके। पेंटागन रिपोर्ट को चीन इसी नजरिए से देख रहा है और उसे अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानता है।

LAC पर शांति: रणनीति या स्थायी समाधान?

हाल के समय में भारत और चीन के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई है, जिसके बाद कुछ इलाकों में तनाव कम हुआ है। हालांकि, सीमा विवाद पूरी तरह सुलझा नहीं है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि LAC पर मौजूदा शांति विश्वास-निर्माण का चरण हो सकती है, लेकिन इसे स्थायी समाधान मानना जल्दबाजी होगी। पेंटागन रिपोर्ट ने इसी अनिश्चितता की ओर इशारा किया था, जिसे चीन ने अपने खिलाफ साजिश के तौर पर देखा।

भू-राजनीतिक संदेश क्या है

यह विवाद सिर्फ एक रिपोर्ट या बयान तक सीमित नहीं है। यह दर्शाता है कि:

भारत अब वैश्विक राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बन चुका है
अमेरिका और चीन दोनों भारत के रणनीतिक फैसलों पर नजर रखे हुए हैं
LAC सिर्फ सीमा नहीं, बल्कि बड़ी भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है

चीन की प्रतिक्रिया यह भी दिखाती है कि वह भारत-अमेरिका रिश्तों पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाने से नहीं हिचक रहा, जबकि अमेरिका अपनी रिपोर्टों के जरिए चीन की नीतियों पर वैश्विक चर्चा बनाए रखना चाहता है।

आगे क्या संकेत मिलते हैं

आने वाले समय में भारत-चीन सीमा पर संवाद जारी रहने की संभावना है, क्योंकि दोनों देश टकराव नहीं चाहते। वहीं भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी भी आगे बढ़ती दिख रही है।

इस पूरे परिदृश्य में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही रहेगी कि वह सीमा सुरक्षा, वैश्विक साझेदारी और रणनीतिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखे।

निष्कर्ष

पेंटागन की LAC रिपोर्ट और उस पर चीन की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एशिया की राजनीति अब केवल द्विपक्षीय नहीं रही। हर बयान, हर रिपोर्ट और हर रणनीतिक कदम के पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन की गहरी गणना छिपी होती है।

भारत इस पूरी बहस के केंद्र में है, और उसकी कूटनीतिक समझ ही तय करेगी कि वह इस त्रिकोणीय दबाव को किस तरह अपने राष्ट्रीय हित में बदलता है।

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