सकट चौथ, जिसे कई क्षेत्रों में संकष्टी चौथ, तिलकुटा चौथ या संकट चौथ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है। सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियों को भी दूर कर देता है।
सकट चौथ 2026 की तिथि और वार
वर्ष 2026 में सकट चौथ का व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को, यानी मंगलवार 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। मंगलवार का दिन भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए इस वर्ष सकट चौथ का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन चतुर्थी तिथि और मंगलवार का संयोग बनता है, उस दिन किया गया गणेश पूजन अत्यंत फलदायी होता है।
आज सकट चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा
सकट चौथ व्रत की सबसे अहम परंपरा है चंद्र दर्शन। यह व्रत पूरे दिन उपवास रखने के बाद रात में चाँद देखने पर ही खोला जाता है। वर्ष 2026 में 6 जनवरी को सकट चौथ के दिन चंद्रमा के उदय का समय लगभग रात 8 बजकर 50 मिनट से 9 बजकर 5 मिनट के बीच माना जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर चंद्र उदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय पंचांग या प्रत्यक्ष चंद्र दर्शन के आधार पर ही व्रत का पारण करें।
चंद्र पूजन और व्रत पारण का शुभ समय
सकट चौथ पर जैसे ही आकाश में चंद्रमा स्पष्ट रूप से दिखाई दे, उसी समय चंद्र पूजन किया जाता है। चंद्रमा को जल अर्पित कर, तिल और अक्षत चढ़ाकर भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। इसके बाद ही व्रत खोला जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चंद्र दर्शन से पहले व्रत खोलने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, इसलिए इस नियम का विशेष ध्यान रखा जाता है।

सकट चौथ व्रत की पूजा विधि
सकट चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर के पूजा स्थान में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। दिनभर उपवास रखा जाता है, जिसमें कुछ महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं तो कुछ फलाहार या केवल तिल से बने पदार्थ ग्रहण करती हैं। शाम के समय फिर से गणेश जी और संकटा माता की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र पूजन कर व्रत का पारण किया जाता है।
सकट चौथ में तिल का विशेष महत्व
सकट चौथ को तिलकुटा चौथ कहे जाने के पीछे तिल का धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि तिल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और शनि दोष से जुड़ी परेशानियों में भी राहत देता है। इसी कारण इस दिन तिल से बने लड्डू, तिलकुट या अन्य मिठाइयों का भोग भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
सकट चौथ व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सकट चौथ का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच के प्रेम और आस्था का प्रतीक भी है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु, अच्छे संस्कार और जीवन में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। भगवान गणेश की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि यह व्रत पीढ़ियों से श्रद्धा के साथ मनाया जाता रहा है।
सकट चौथ पर पढ़े जाने वाले मंत्र
सकट चौथ की पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ जैसे मंत्रों के जाप से मन को शांति मिलती है और पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। मंत्र जाप के साथ यदि मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो भगवान गणेश अवश्य ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सकट चौथ व्रत में बरती जाने वाली सावधानियां
सकट चौथ के व्रत में शुद्धता और संयम का विशेष ध्यान रखा जाता है। दिनभर मन में नकारात्मक विचार न लाने, क्रोध से बचने और वाणी पर संयम रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि व्रत के दौरान किया गया संयम ही इस व्रत की सबसे बड़ी शक्ति है।
निष्कर्ष
सकट चौथ 2026 का व्रत मंगलवार 6 जनवरी को रखा जाएगा और इस दिन चाँद के रात लगभग 8:50 बजे के बाद निकलने की संभावना है। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। यह व्रत भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने और संतान की सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ किया गया सकट चौथ व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली लेकर आता है।







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