भारत के खूबसूरत पर्वतीय राज्यों में से एक, उत्तराखंड ने 9 नवंबर 2025 को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर लिए। इस विशेष अवसर पर पूरे राज्य में हर्ष और उल्लास का माहौल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों और खास तौर पर उत्तराखंड के लोगों को इस ऐतिहासिक दिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उत्तराखंड ने इन 25 वर्षों में विकास, पर्यटन, और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में जो प्रगति की है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
उत्तराखंड की स्थापना – संघर्ष से सफलता तक का सफर
9 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) को उत्तर प्रदेश से अलग कर नया राज्य बनाया गया, तब लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद जगी थी। लंबे संघर्ष और जनआंदोलनों के बाद यह सपना साकार हुआ। पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग थी कि उन्हें अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप एक अलग राज्य मिले। आखिरकार, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इस मांग को स्वीकार किया और उत्तरांचल राज्य का गठन किया, जिसे बाद में 2007 में उत्तराखंड नाम दिया गया।
प्रधानमंत्री का संदेश – “देवभूमि का योगदान अतुलनीय”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा, “देवभूमि उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर वहां के परिश्रमी और वीर लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। उत्तराखंड ने न केवल देश को गौरवान्वित किया है, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और साहसिक परंपराओं से पूरी दुनिया का दिल जीता है।
”उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड के लोग अपनी ईमानदारी, वीरता और सेवा भावना के लिए जाने जाते हैं। भारतीय सेना में उत्तराखंड के जवानों का योगदान अद्वितीय है। वहीं, राज्य की महिलाएं और युवा आज कृषि, पर्यटन, शिक्षा और उद्योग में नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं।
देवभूमि की संस्कृति और पहचान
उत्तराखंड को “देवभूमि” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ अनेकों प्राचीन मंदिर, तीर्थ स्थल और धार्मिक धरोहरें हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे चार धाम न केवल हिंदू आस्था के केंद्र हैं बल्कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं।
राज्य की संस्कृति अपनी सादगी, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों के लिए जानी जाती है। गढ़वाली और कुमाऊंनी संस्कृति की झलक यहां के हर त्योहार में देखने को मिलती है। चाहे फूलदेई हो, हरेला या घी संक्रांति — हर पर्व प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाता है।
25 वर्षों की विकास यात्रा
उत्तराखंड ने अपने दो दशक के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन राज्य ने हर चुनौती को अवसर में बदला है। पहाड़ी इलाकों की कठिनाइयों के बावजूद राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार किया है।
पर्यटन क्षेत्र में उत्तराखंड ने भारत का गौरव बढ़ाया है। चार धाम यात्रा, एडवेंचर टूरिज्म, योग और वेलनेस टूरिज्म के चलते राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण में भी राज्य अग्रणी रहा है।
महिला शक्ति का योगदान
उत्तराखंड की महिलाएं राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर आज तक हर मोर्चे पर अग्रणी रही हैं। चाहे जंगल बचाओ आंदोलन हो या स्वरोजगार योजनाएं — महिलाओं ने हमेशा समाज को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। आज भी स्वरोजगार समूहों और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से महिलाएं राज्य की अर्थव्यवस्था में मजबूत योगदान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री की दृष्टि – “विकसित उत्तराखंड, सशक्त भारत”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को विकसित भारत 2047 के विज़न का एक प्रमुख स्तंभ बनना है। केंद्र सरकार ने राज्य में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं — जैसे चारधाम ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, और हेली सेवा नेटवर्क।
उनके अनुसार, इन परियोजनाओं से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में असीम संभावनाएं हैं और आने वाले समय में यह राज्य देश के सर्वाधिक प्रगतिशील राज्यों में गिना जाएगा।
उत्तराखंड के लोगों का उत्साह
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में रंगारंग झांकियां, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा में लोगों ने अपने राज्य की गौरवगाथा को प्रदर्शित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड की जनता की मेहनत और समर्पण के कारण राज्य ने आज जो ऊंचाई हासिल की है, वह हर नागरिक के गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में राज्य को “देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन और शिक्षा केंद्र” बनाने का लक्ष्य है।
आगे की राह – पर्यावरण और रोजगार पर फोकस
उत्तराखंड की सबसे बड़ी पूंजी उसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय विरासत है। आने वाले वर्षों में राज्य सरकार का ध्यान पर्यावरण-संवेदनशील विकास, ग्रीन एनर्जी, इको-टूरिज्म और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने पर रहेगा।
साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पलायन की समस्या को रोकना भी सरकार की प्राथमिकता में है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड के युवाओं को स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष – गौरवशाली 25 वर्ष, उज्जवल भविष्य की ओर
उत्तराखंड की 25वीं वर्षगांठ न केवल एक उत्सव है बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प का भी अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व की भावना को और मजबूत किया — एक ऐसा राज्य जो देवभूमि कहलाता है, जिसने देश को वीर सैनिक, महान संत और मेहनती नागरिक दिए हैं।
आज उत्तराखंड गर्व से कह सकता है कि उसने अपनी पहचान बनाई है और आने वाले वर्षों में “विकसित भारत का उज्जवल उत्तराखंड” बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।







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